Friday, 13 October 2017

प्रकृति पर विजय


प्रकृति पर विजय का मतलब  अधिपत्य न होकर विकासक्रम की श्रेणी मे आ जाता अर्थात् यद्यपि हम प्रकृति को कुछ देते हैं तो वो विजय है ।

जैैैसे

महार्षि कणाद  :-- जिन्होंने अणु की खोज की, महार्षि कणाद परमाणु की अवधारणा के जनक माने जाते हैं। आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी जान डाल्टन के भी हजारों साल पहले महर्षि कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं।

महार्षि आर्यभट्ट :- आर्यभट (४७६-५५०) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे।उन्होंने एक ओर गणित में पूर्ववर्ती  आर्कमिडीज से भी अधिक सही तथा सुनिश्चित पाई के मान को निरूपित किया तो दूसरी ओर खगोलविज्ञान में सबसे पहली बार उदाहरण के साथ यह घोषित किया गया कि स्वयं पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
जिनका विश्व  शास्त्र (Science) का योगदान अतुलनीय है।

             ऐसे अनेको महार्षि (वैज्ञानिक)है जिनका ऋण कोई नही चुका सकता। आज पूरा विश्व उनके गणनाओं और शास्त्रो के आधार पर चल रहा है यही प्रकृति पर विजय है।
कोई भी देश या उसका नागरिक यह नही कह सकता की मै भारत के ऋण से मुक्त हूं यही है विजय।

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